अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी, भ्रष्टाचार के एक के बाद एक खुलासे के बीच धृतराष्ट्र-संजय संवाद की वापसी हो रही है. धृतराष्ट्र के पहले सवाल पर ही संजय के सब्र का भाखड़ा नांगल टूट कर बिखर गया. उन्होंने कहा- “महाराज, अनर्थ चल रहा है देश में. अवध में मर्यादा पुरुषोत्तम की मर्यादा तार-तार हो गई. मंदिर में डकैती पड़ गई.”
संजय के मुख से आप्त वचन सुनते ही दरबारी अपनी रीढ़ सीधी कर एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे. पसोपेश के इसी पल में दरबार का पर्दा उठ गया. धृतराष्ट्र के माथे पर भी चिंता की एकाध लकीरें खिंच आईं. जो जगत की मर्यादा रखते हैं भला किसकी मजाल जो उनकी मर्यादा तार तार कर सके. वो फड़कते हुए बोले- “तुम होश में तो हो? महमूद गजनवियों का दौर जा चुका है.”
संजय ने एक गहरी सांस भरी और बोले, महाराज, इस बार तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहा दम था. पहले ये रंज था कि गैर लूट रहे हैं, अब इतना सा सब्र है कि अपनों ने हमें लूटा.
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