
“मैं अपने ठेले पर ग्राहकों को लिट्टी-चोखा बेच रहा था. अचानक एक ज़ोरदार धमाका हुआ. ठेले की छत गिर गई… हम भी ठेले पर ही गिर गए.. हमारे ठेले पर एक बैनर लगा था वो भी हमारे ऊपर आ गिरा.. हम तुरंत ठेला छोड़कर भागे..” लाल किले के पास हुए धमाके को याद करते हुए अपेंद्र कुमार यादव यही सब बताते हैं. जब धमाका हुआ तो वह लाल किले के पास अपने ठेले पर थे और वो खौफनाक मंजर उन्होंने अपनी आंखों से देखा.
जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम एक कार में अचानक से विस्फोट हो गया. इस विस्फोट में अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के अलावा भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. हालांकि, धमाके के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है. वहीं, इस बीच लाल क़िला परिसर गुरुवार तक आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है.