धीरज कुमार गौंड राजधानी पटना के मेदांता अस्पताल के बाहर मिलते हैं. वे यहां अपने चचेरे भाई बुलेट कुमार गौंड की देखरेख कर रहे हैं, जिन्हें 25 जुलाई, 2026 को सिवान में गोली लग गई थी. सिवान जिले के डुमरहर गांव के रहने वाले धीरज बताते हैं, “मेरा भाई बुलेट पुलिस और आर्मी की नौकरी के लिए तैयारी करता है. आर्मी की दौड़ में उसका सिलेक्शन हो गया था. उसने मुझे बताया कि वह उस रोज जाति और आवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सिवान आया था. रेलवे स्टेशन से वह जिला समाहरणालय जा रहा था. वह अड्डा नंबर दो के पास पहुंचा तो उसने देखा कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो रही है और दोनों तरफ से रोड़ेबाजी हो रही है. उसने सोचा कि वह किनारे से निकल जायेगा. मगर तभी पुलिस गोलियां चलाने लगी और एक गोली उसके पांव में घुटने से नीचे लग गई. गोली आर-पार हो गई.”
वे बताते हैं, “फिर पुलिस उसे लेकर यहां आई. यहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हड्डी टूट गई है. उसकी सर्जरी हुई है और उसे स्टील का रॉड लगा है.”