
मंगलवार (5 अगस्त) की दोपहर जब सोशल मीडिया पर धराली में बाढ़ की पहली तस्वीरें आईं तो इसमें कोई शक नहीं था कि यह हिमालय के आधुनिक कालखंड की सबसे भयानक त्रासदियों में एक है. एक रिपोर्टर के तौर पर आप जल्दी से जल्दी उस जगह पहुंचना चाहते हैं जहां यह घटना हुई है. लेकिन मैं धराली से 500 किलोमीटर से अधिक दूर था. यह जानते हुए कि आखिरी 150 किलोमीटर का रास्ता भूस्खलन और सड़क कटाव की वजह से बाधाओं से भरा होगा यह दूरी किलोमीटर में नहीं नापी जा सकती थी.
तस्वीरों ने स्पष्ट कर दिया था कि एक पूरा गांव मलबे में दफन हो गया है और घटनास्थल पहुंच कर बाद में पता चला कि बाढ़ की शक्ल में ये मलबा एक नहीं कई बार आया था. घटना के बारे में दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पता चला और कुछ ही घंटों के भीतर न्यूज़लॉन्ड्री के आशीष आनंद के साथ मैंने धराली के लिए यात्रा शुरू कर दी थी. हर स्रोत से जानकारी इकट्ठा करते और घटनास्थल के ज़्यादा से ज़्यादा पास पहुंचने की कोशिश में हमने तय किया कि हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक आगे बढ़ना नामुमकिन न हो जाये.