
2005 के 59वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न के कुछ हफ़्ते बाद सितंबर में मूसलाधार बारिश वाले एक दिन, मुझे मुंबई में अपनी पहली नौकरी का मौका मिला. वो मौसम आत्मविश्वास से भरी अकड़ का था. भारत "अगला चीन" था, शेयर बाजार तेजी से चढ़ रहा था और आशावाद मानसून की बारिश से भी तेज से बरस रहा था.
एक दैनिक समाचार पत्र के लिए एक व्यक्तिगत वित्त लेखक के रूप में मैं दूसरों के पैसे का प्रबंधन (OPM) के व्यवसाय से जुड़े लोगों– जिन्हें आम तौर पर फंड मैनेजर कहा जाता है– से मिलता, और उनमें से कोई भी भारत की विकास गाथा के बारे में बातें कहने से खुद को नहीं रोक पाता था.