
देश की राजधानी दिल्ली में कचरा प्रबंधन एक गंभीर संकट बनता जा रहा है. जहां एक ओर स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) 2.0 का लक्ष्य है कि 2026 तक सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाया जाए, वहीं ओखला इलाके की स्थिति सरकार के दावों को खोखला साबित करती है. यहां न तो डस्टबिन लगाए गए हैं, न डोर-टू-डोर कलेक्शन होता है, और न ही कचरा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से आती हैं. नतीजा ये है कि कॉलोनियों के बीचोंबीच जगह-जगह छोटे-छोटे डंपिंग यार्ड बन गए हैं. स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कई जगहों पर स्थानीय लोग लाउडस्पीकर लगाकर चेतावनी दे रहे हैं, “यहां कूड़ा न डालें.”