
इस हफ्ते बात डंकापति के जलवे की. दरबार कई दिनों बाद सजा था. फ़िज़ा में गर्मियों की बेचैनी फैली हुई थी. गोया कि फाड़ू टाइप गर्मी पड़ रही थी. दबी जुबान में डंकापति के जश्न के चर्चे चल रहे थे और संजय समेत समस्त दरबारी, उनकी ताजा चुनावी सफलता को अह्लादित होकर निहार रहे थे. आर्यावर्त में उनके अश्वमेध का घोड़ा बंगाल से लेकर कामरूप प्रदेश तक निर्बाध दौड़ रहा है.