नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली यानि राजधानी का वो हिस्सा, जहां तंग गलियों और भीड़भाड़ के पीछे एक और दुनिया पल रही है. नाबालिगों का अंडरवर्ल्ड. यहां उम्र छोटी है, लेकिन हाथों में हथियार बड़े. यहां चाकू और कट्टों के साथ ये बच्चे सिर्फ डर नहीं बल्कि मौत भी बांट रहे हैं. कई महीनों तक हमने इस इलाके की खाक छानी. दिन हो या रात उन गलियों से लेकर उन ठिकानों तक पहुंचे. जहां से खौफ की ये कहानियां जन्म लेती हैं. हर वारदात के पीछे छिपे पैटर्न को समझने की कोशिश की और उन चेहरों तक पहुंचे जो इस अंडरवर्ल्ड का हिस्सा बन चुके हैं.
दरअसल, यह उत्तर-पूर्वी दिल्ली की वो गलियां हैं, जिनके भीतर एक ऐसी दुनिया सांस लेती है, जिसे बहुत कम लोग करीब से देख पाते हैं. एक ऐसा अंधेरा संसार जहां कई नाबालिगों के हाथों तक किताबों से पहले हथियार पहुंच जाते हैं. यहां गैंग का हिस्सा बनना और अपराध की दुनिया में कदम रखना कई युवाओं के लिए असामान्य नहीं बल्कि एक कड़वी हकीकत बन चुका है. अक्सर, ये घटनाएं अखबार की सुर्खियां ही बनकर रह जाती हैं. आखिर ये बच्चे अपराध की दुनिया में क्यों बढ़ रहे हैं? क्या आसपास का माहौल इन्हें इस दिशा में ले जाता है? क्या गरीबी, बेरोजगारी और टूटता सामाजिक ढांचा इसकी बजह है? या फिर व्यवस्था इन्हें दूसरा रास्ता ही नहीं देती?