
दिल्ली में रहने वाली 45 वर्षीय घरेलू कामगार सुलेखा पासवान ने कहा, "अब मुझे मेरे बच्चों के खाने और मैं कहां रहूंगी इसकी चिंता है."
इस महीने की शुरुआत में कालका जी के भूमिहीन कैंप में अपने घर को तोड़ दिए जाने के बाद से सुलेखा दक्षिण दिल्ली की झुग्गी बस्ती में अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रही हैं. इस घटना से तीन दिन पहले ही उन्हें घर खाली करने का नोटिस मिला था. सुलेखा ने बुलडोजरों को अपने घर और अपने मोहल्ले को ढहाते हुए देखा, जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सीधा-सीधा उल्लंघन है, जिनके अनुसार उनके जैसे निवासियों को कम से कम 15 दिन पहले नोटिस दिया जाना चाहिए.