
धृतराष्ट्र को संजय ने इस हफ्ते रावण की एक काल्पनिक कथा सुनाई. दशहरे में जलने के बाद रावण पूरी फुर्सत में था. उसके पास पूरे एक साल का वक्त था. और मायावी तो वह था ही. एक दिन वह बोरियत से बचने के लिए छात्र का भेस धर कर पाठशाला में बच्चों के बीच बैठ गया. हिंदी की कक्षा चल रही थी. फिर क्या हुआ?