
इसी हफ्ते आपातकाल को 50 साल हो गए हैं. लेकिन चिंता न करें- हमारे समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल, अपनी ज़िम्मेदारी, स्वतंत्र सोच और पूरी तरह मूल्य-आधारित कवरेज के साथ, आपको इसकी याद ज़रूर दिलाएंगे.
25 जून, 1975 को लोकतांत्रिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था. उस समय के युवा, आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसकी चपेट में आए थे. मोदीजी ने सरदार के वेश में इंदिरा के क्रोध का सामना किया, लेकिन नागरिकों के पास कोई आवाज़ नहीं थी. लेकिन, भगवान का शुक्र है कि मोदीजी ने वह लड़ाई कभी नहीं छोड़ी. बेशक, वह मीडिया जिसे ‘झुकने को कहा गया था और वह रेंगने लगा’ था, उसने मोदीजी का समर्थन नहीं किया.