
षीयूष का मतलब होता है अमृत. मगर नाम पीयूष होने का मतलब ये नहीं कि आप अमरत्व लेकर पैदा हुए हैं. ‘एड लीजेंड’ पीयूष पांडे भी चले ही गए. पीयूष ब्राम्हण थे, ब्राह्मणों को द्विज यानि दुजन्मा कहने की परम्परा है. तो वो जयपुर में पैदा भले 1955 में हुए थे उनको दूसरा जन्म 1982 में विज्ञापन की दुनिया में मिला. (इस लिहाज से कला बहादुर पीयूष पांडे बस 43 साल के ही थे, मगर एक खास किस्म की पूर्णता प्राप्त कर चुके थे) बहरहाल विज्ञापन की दुनिया से, मास कम्युनिकेशन की कला से वो मरते दम तक दूर न हुए. विज्ञापन की दुनिया, ‘एड की दुनिया’ हद तक अंग्रेजी की दुनिया मानी जाती है, मगर जब पीयूष की शवयात्रा चली तो पीछे से एक गूंगा आर्तनाद गूंज रहा था.
”कोई तो रोको रे भाई...कला का मतवाला हाथी चला…..भारतीय विज्ञापनों का मध्यवर्गीय किस्सागो गया रे भाई...मगर अंतिम यात्रा धीरे-धीरे ओझल हो गयी.“