
2002 में गुजरात दंगों के साए में विधानसभा चुनाव करवा कर नरेंद्र मोदी गुजरात के दोबारा मुख्यमंत्री बने ही थे. उसी दौरान मई 2003 में गुजरात समाचार में एक ख़बर छपी. जिसका शीर्षक था, ‘ઉપરાષ્ટ્રપતિ કરતાં મુખ્યમંત્રીનો કાર કાફલો મોટો’ यानी मुख्यमंत्री की कारों का बेड़ा उपराष्ट्रपति से भी बड़ा.
गुजरात समाचार की इस ख़बर में बताया गया कि वीर सावरकर की तस्वीर के अनावरण के लिए देश के उपराष्ट्रपति गुजरात पहुंचे थे. उनके साथ गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे. उपराष्ट्रपति के काफिले से ज़्यादा गाड़ियां मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले में मौजूद थी. आगे इसी ख़बर में लिखा गया- ‘गुजरात के कई नेताओं के कहने और करने का तरीका अलग-अलग होता है. पाखंड उनके जीवन का एक अंग बन गया है.’