
अंग्रेज़ उपन्यासकार डीएच लॉरेंस ने अपने विश्व प्रसिद्ध उपन्यास ‘द फर्स्ट लेडी चैटर्ली लवर’ में एक जगह लिखा है- ‘इच्छाओं और कामनाओं का परवाह ही जीवन है.’
डी.एच. लॉरेंस ने यह बात अपने उपन्यास की नायिका के लिए कही थी, जो न केवल समृद्ध थी बल्कि अपने अधिकारों के प्रति सचेत भी थी. गीताश्री की नायिकाएं असंख्य हैं. वे न तो आर्थिक रूप से समृद्ध हैं और न ही अपने अधिकारों के प्रति उतनी सचेत. फिर भी लॉरेंस की यह पंक्ति जितनी उनके उपन्यास की नायिका के लिए कही गई है, उससे कहीं ज्यादा गीताश्री की कहानियों की नायिकों के प्रति कही जान पड़ती है.