
कोई देश तब तक महान या विश्वगुरू न तो बन सकता है ना ही बनने का हकदार है जब तक कि वह अपने हर नागरिक के जीवन को समान महत्व नहीं देता.

कोई देश तब तक महान या विश्वगुरू न तो बन सकता है ना ही बनने का हकदार है जब तक कि वह अपने हर नागरिक के जीवन को समान महत्व नहीं देता.